पटना का ऐतिहासिकआकर्षण : जादूघर

पटना का ऐतिहासिकआकर्षण : जादूघर

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Patna Museum
Image Credit: myjourneythroughindia

पटना में यूं तो काफी सारी ऐसी जगहें हैं जो ऐतिहासिक महत्व रखते हैं | उनमे से एक हैं पटना संग्रहालय |

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पटना संग्रहालय ब्रिटिश राज के दौरान 1917 में किया गया था |इसे स्थानीय लोग “जादूघर” से  नाम से जानते हैं |



इस संग्रहालय में पाटलिपुत्र और उसके आस पास की जगहों में पाए गए वस्तुओं का संग्रह है |

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इस संग्रहालय में दुर्लभ संग्रह का भंडार है। संग्रहालय नव पाषाणकालीन पुरावशेषों और चित्रों,
दुर्लभ सिक्कों, पांडुलिपियों, पत्थर और खनिज, तोप और शीशा की कलाकृतियों से समृद्ध है। वैशाली में लिच्छवियों द्वारा भगवान बुद्ध की मृत्यु के बाद बनवाए गए प्राचीनतम मिट्टी के स्तूप से प्राप्त बुद्ध के दुर्लभ अस्थि अवशेष वाली कलश मंजूषा है तो वृक्ष का जीवाश्म संग्रहालय में काफी पुराने चीड़ के एक वृक्ष का जीवाश्म भी यहां रखा हुआ है, जिसे देखने के लिए विदेश से भी लोग आते हैं। संग्रहालय में रात्रि की रोशनी व्यवस्था भी प्रशंसनीय है।

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मुगल-राजपूत वास्तुशैली में निर्मित पटना संग्रहालय को बिहार की बौद्धिक समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। भवन के केंद्र पर आकर्षक छतरी, चारों कोनों पर गुंबद और झरोखा शैली की खिड़कियां इसकी विशिष्टताएं हैं।

इस संग्रहालय के प्रांगन में काफी बड़ा उद्यान भी है जिसमे अक्सर प्रेमी जोड़ों को घूमते देखा जा सकता है |

संग्रहालय के पिछले तरफ भगवान बुद्ध की एक बड़ी प्रतिमा बनायीं गयी है |

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यहाँ नववर्ष और अन्य छुट्टियों के दिन काफी सारे परिवार यहाँ घूमने आते हैं

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